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लेबनान में इजरायली हमले में 18 की मौत, 33 घायल

इजरायल-हिजबुल्ला संघर्ष तेज, बढ़ी चिंता
बेरुत: अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए हुए समझौते के ठीक एक दिन बाद लेबनान के नबातियेह जिले में गुरुवार रात हुए इजरायली हमले में 18 लोगों की मौत हो गयी और 33 अन्य घायल हो गए।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। दूसरी ओर इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि हिजबुल्ला के साथ मुठभेड़ में उसके चार सैनिक मारे गए हैं। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्ला से जुड़े 80 ठिकानों पर हमला किया और उसके 10 से अधिक लड़ाकों को मार गिराया। वहीं हिजबुल्ला ने कहा है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना को जाल में फंसाकर मिसाइलों से उनके तीन टैंक नष्ट कर दिए।
यह भीषण गोलाबारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटों बाद हुई है। इस समझौते में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी को स्थायी रूप से समाप्त करने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है। समझौते के बावजूद, इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसका लेबनान से अपनी सेना हटाने का कोई इरादा नहीं है। इजरायल का कहना है कि हिजबुल्ला के साथ उसका संघर्ष ईरान के साथ चल रहे युद्ध से अलग है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इटामार बेन-ज्विर ने सैनिकों की मौत पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘पूरा लेबनान जलना चाहिए’ और देश की सुरक्षा पर कोई सौदा नहीं होगा।

ट्रंप-नेतन्याहू के बीच मतभेद
इस बढ़ते तनाव ने अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों को बढ़ा दिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट के कुछ मंत्रियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे वास्तविकता को समझें, क्योंकि 90 लाख की आबादी वाला देश केवल हत्याओं के दम पर अपनी सुरक्षा समस्याओं को हल नहीं कर सकता। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस हालिया संघर्ष की शुरुआत से अब तक महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 3,912 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 11,699 अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा, करीब 10 लाख लोग विस्थापित हैं और दक्षिणी लेबनान के कई इलाके पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। फ्रांस ने इजरायल से इस शांति समझौते का सम्मान करने का आग्रह किया है।

सैनिकों की मौत से भड़के बेन-ग्विर, बोले लेबनान जला दो
तेल अवीव, एजेंसी: दक्षिणी लेबनान में लड़ाई में इजरायली सेना के चार सैनिकों के मारे जाने के बाद इजराइल रक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने लेबनान को ‘जलाने’ का आह्वान किया है। बेन-ग्विर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, अमेरिकियों के प्रति पूरे सम्मान के साथ, इजरायल को पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा कोई मामूली बात नहीं है। पूरा लेबनान जलना चाहिए। उन्होंने कहा, मैंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपनी निजी मुलाकातों में भी कहा था कि एक इजरायली मां के हर आंसू के बदले हजार लेबनानी माताओं को रोना होगा। उन्होंने यह भी कहा, इस क्षेत्र में आपको आक्रामक होना होगा। सब कुछ मिटाना होगा। आतंक को कुचलना होगा।
इजरायली सेना ने युद्ध के दौरान दक्षिणी लेबनान में चार सैनिकों के मारे जाने की घोषणा की है। सेना ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में इन चार सैनिकों में से एक की पहचान 32 वर्षीय लेफ्टिनेंट डोर गेडालिया बेन सिमहोन के रूप में की है। वह 52वीं बटालियन और 41वीं ब्रिगेड के कमांडर थे। इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने भी रातभर चली भीषण लड़ाई के बाद लेबनान के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई का आह्वान किया है।स्मोट्रिच ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इसे एक ‘मुश्किल सुबह’ बताया। उन्होंने कहा, अब आग की भाषा में बात करने का समय है। नरक के दरवाजे खोलने का समय है।

बुद्ध पूर्णिमा समारोह में सतपाल महाराज का बड़ा बयान

विकासनगर (देहरादून), 1 मई 2026। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश को ‘बौद्ध सर्किट कॉरिडोर’ में शामिल कराने के लिए ठोस प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

कालसी क्षेत्र में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे महाराज ने केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों में प्रस्तावित बौद्ध सर्किट का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड, विशेषकर देहरादून स्थित प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों को इस योजना से जोड़ना प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा।

उन्होंने देहरादून के माइंडरोलिंग मठ और बुद्धा टेंपल को बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि यहां स्थित विशाल स्तूप और भगवान बुद्ध की प्रतिमा देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है।

महाराज ने अपने संबोधन में बुद्ध पूर्णिमा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, जिससे यह तिथि विशेष रूप से पावन मानी जाती है। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में शांति, सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।

समारोह में कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार

रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

उत्तराखंड में सहकारिता के माध्यम से बहुउद्देशीय सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से व्यापक कार्य किया जा रहा है। कृषि, मिलेट्स, रेशम उत्पादन, सब्जी क्रय, बायोफर्टिलाइजर वितरण, साइलेज विक्रय और सामूहिक सहकारी खेती जैसी गतिविधियों से समितियों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है तथा किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है।

राज्य में मिलेट्स मिशन के अंतर्गत 214 क्रय केंद्रों के माध्यम से लगभग 53,000 कुंतल मंडुवा की खरीद की गई है। इस खरीद पर सहकारी समितियों को ₹100 प्रति कुंतल सेवा शुल्क के आधार पर लगभग ₹53 लाख की आय प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से साइलेज का वितरण किया जा रहा है। राज्य में कुल 181 केंद्रों (गढ़वाल में 96 और कुमाऊं में 85) के माध्यम से लगभग 20,000 टन उच्च गुणवत्ता का साइलेज विक्रय किया गया है, जिससे सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

उत्तराखंड सहकारी संघ के माध्यम से टिहरी और उत्तरकाशी जनपदों में पांच सहकारी समितियों द्वारा किसानों से सीधे सब्जियों की खरीद की जा रही है। वर्तमान वर्ष में अब तक किसानों से लगभग ₹1.50 करोड़ मूल्य की सब्जियों की खरीद की जा चुकी है, जिन्हें बाजार में बेहतर मूल्य पर विक्रय किया गया है। इस प्रक्रिया में सहकारी समितियों को लगभग ₹3 लाख की आय प्राप्त हुई है।

आगामी 1 अप्रैल से 22 सहकारी समितियों के माध्यम से सब्जी क्रय कार्य का विस्तार किया जाएगा, जिससे समितियों को 2 प्रतिशत लाभांश प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त बायोफर्टिलाइजर के क्रय-विक्रय में भी सहकारी समितियां सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं, जिससे 14 समितियों को लगभग ₹68.38 लाख की आय प्राप्त हुई है।

इसी क्रम में धान खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य की 115 गृह सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

सहकारिता क्षेत्र में रेशम उत्पादन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन अपने सदस्य कीटपालन सहकारी समितियों के माध्यम से कच्चे रेशम कोया का उत्पादन कराता है और जिन कीटपालकों को अपने उत्पाद के विपणन में कठिनाई होती है, उन्हें 100 प्रतिशत विपणन सुविधा और त्वरित भुगतान उपलब्ध कराया जाता है।

वर्तमान में राज्य में लगभग 6500 रेशम कीटपालक रेशम उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इनमें से लगभग 4000 कीटपालकों से फेडरेशन द्वारा करीब 25,000 किलोग्राम कच्चे रेशम कोया की खरीद की जाती है। इस कच्चे रेशम को पूर्ण उत्पादन श्रृंखला में उपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के रेशमी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन द्वारा लगभग ₹6.30 करोड़ मूल्य के रेशम उत्पादों का उत्पादन किया गया, जबकि ₹2.53 करोड़ के रेशम वस्त्रों का विक्रय किया गया।

उत्तराखंड सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, कीटपालकों और बुनकरों को बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बयान-

राज्य सरकार लक्ष्य प्रदेश में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। सहकारिता का सीधा लाभ किसानों, काश्तकारों, कारीगरों और युवा उद्यमियों को मिले इसके लिये ठोस नीतियां तैयाकर कर धरातल पर उतारी जा रही है।