ताज़ा खबरें
मॉक ड्रिल से परखी जाएंगी मानसून की तैयारियां
  • 02 जुलाई को होगी मानसून पूर्व तैयारियों पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल
  • सभी 13 जनपदों में करीब 70 स्थानों पर एक साथ होगा आयोजन
  • मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में यूएसडीएमए ने शुरू की तैयारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में 02 जुलाई को राज्य के सभी 13 जनपदों में मानसून में घटित होने वाली आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर ओरिएंटेशन एवं कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी जनपदों को मॉक ड्रिल के सफल संचालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों मानसून पूर्व विभागीय तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान मानसून की तैयारियों को अंतिम रूप देने तथा विभिन्न विभागों के मध्य आपसी समन्वय तथा सामंजस्य को मजबूत करने के लिए मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने बताया कि यह मॉक राज्य के सभी 13 जनपदों में करीब 70 स्थानों पर आयोजित की जाएगी। जिन स्थानों में पहले मॉक ड्रिल की जा चुकी है, उन स्थानों पर यह नहीं की जाएगी। इस बार सभी स्थान नए होंगे।
उन्होंने बताया कि 30 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज तथा 30 जून को मॉक ड्रिल का आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल का आयोजन आईआरएस यानी घटना प्रतिक्रिया प्रणाली के अंतर्गत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि टेबल टाॅप एक्सरसाइज के दिन सभी जनपद अपनी तैयारियों के साथ ही संसाधनों की उपलब्धता, उनकी तैनाती, मॉक ड्रिल के लिए योजना के बारे में बताएंगे।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन प्रकाश चंद्र ने एटीआई नैनीताल से आपदा प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सरकारी कर्मचारियों का डाटा बेस बनाने तथा उन्हें प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में तैयार करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टेबल टॉप अभ्यास तथा मॉक अभ्यास को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल के माध्यम से विभिन्न विभागों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाएगा तथा राहत एवं बचाव कार्यों में बेहतर तालमेल स्थापित करने का अभ्यास किया जाएगा। इस दौरान संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, आरटीओ देहरादून डॉ. अनीता चमोला, अरुण कुमार पाण्डे, शांतनु सरकार आदि मौजूद थे।

राहत शिविरों की व्यवस्थाओं को परखा जाएगा
देहरादून। मॉक अभ्यास के दौरान राहत शिविरों की स्थापना का अभ्यास भी किया जाएगा। वहां बिजली, पानी, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा, शिशु आहार के साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए रियल टाइम में उन्हें परखा जाएगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस तथा होमगार्ड के जवानों की तैनाती भी राहत शिविरों में की जाएगी।

सामुदायिक सहभागिता से मजबूत होगी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था
देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मॉक ड्रिल में सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान स्थानीय समुदाय सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली इकाई होता है, इसलिए समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल में पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्द्धसैनिक बल (सीएपीएफ) के जवानों, आपदा मित्रों, स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ), एनसीसी, एनएसएस, रेड क्रॉस तथा अन्य स्वयंसेवी समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

आपदा प्रबंधन उपकरणों की प्रदर्शनी लगाने के निर्देश
देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मॉक ड्रिल से पूर्व आयोजित की जाने वाली टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान विभिन्न आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों द्वारा उपकरणों एवं संसाधनों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी तथा उनके संचालन का अभ्यास भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों में प्रयुक्त आधुनिक उपकरणों, संचार प्रणालियों, खोज एवं बचाव संसाधनों तथा आपदा प्रतिक्रिया वाहनों का प्रदर्शन किया जाएगा।

इन परिदृश्यों पर होगा अभ्यास
देहरादून। मॉक ड्रिल के दौरान मानसून जनित विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा। इनमें रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव, तटबंधों को खतरा, स्कूलों से बच्चों की सुरक्षित निकासी, भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होना, कट-ऑफ क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना, जल विद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़े जाने पर अलर्ट जारी करना तथा छतों पर फंसे लोगों का हेली रेस्क्यू जैसे परिदृश्य शामिल हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आधारभूत संरचनाओं के विकास में दिया जाए विशेष ध्यान : सीएस

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों के वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत केंद्र पोषित योजनाओं, वाह्य सहायतित योजनाओं, नाबार्ड और स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए आईएफएमएस पोर्टल पर शीघ्र अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने वित्त विभाग को नाबार्ड के अंतर्गत पशुपालन, फिशरीज आदि आजीविका से संबंधित विभागों में बजट की कोई सीलिंग ना रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आजीविका से संबंधित इन योजनाओं को वाइब्रेंट विलेज में भी अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए, ताकि इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।
मुख्य सचिव ने नियोजन और वित्त विभाग को सभी विभागों से समन्वय बनाते हुए लगभग 2 से 3 हज़ार करोड़ के प्रस्तावों को तैयार रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं को शोर्ट लिस्ट करते हुए प्राथमिकता के आधार पर टेंटेटिव लिस्ट तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा भी लगातार अच्छे प्रस्ताव तैयार करते हुए शासन को भेजे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किस योजना के लिए फंडिंग कहाँ से की जाएगी इस पर आगे विचार कर लिया जाएगा परंतु विभागों द्वारा प्रस्ताव तो लगातार तैयार किए जाने चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए आधारभूत संरचनाओं के विकास में विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए नाबार्ड के अंतर्गत ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (RIDF) के तहत की जा सकती है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को स्कूल और अस्पताल भवनों को सुदृढ़ किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को सौंग और जमरानी बांध निर्माण कार्य की फाइनेंसियल टाइमलाइन तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टाइमलाइन निर्धारित कर लगातार मॉनिटरिंग की जाए ताकि टाइमलाइन का अनुपालन किया जा सके। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग और उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण UREDA को पीएम कुसुम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान अभियान का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुँचाये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा को सिंचाई और UREDA के साथ शीघ्र समन्वय बैठक आयोजित किये जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को प्रदेश के चारधाम यात्रा मार्गों सहित अन्य सभी महत्त्वपूर्ण यात्रा मार्गों को ईवी चार्जिंग स्टेशन से संतृप्त किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा की प्रदेश में आने वाले पर्यटक अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल लेकर यात्रा कर सकें इसके लिए इन चार्जिंग स्टेशंस की लोकेशन को गूगल मैप पर भी प्रदर्शित किया जाए ताकि लोगों का लंबे पहाड़ी रास्तों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल लाने का विश्वास पैदा हो सके।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर. सी. पुरुषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, सी. रविशंकर, युगल किशोर पंत एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति

देहरादून। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी। धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एमडीडीए की सख्ती : अवैध कॉलोनी बसाने की कोशिश नाकाम, विकासनगर तहसील अंतर्गत रेतीवाला क्षेत्र में दोबारा की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई

अतुल्यम रिजॉर्ट के पास 10 बीघा में अवैध प्लाटिंग, सीसी सड़क निर्माण पर चला बुलडोजर

देहरादून : मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा अवैध प्लाटिंग एवं अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान लगातार युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर प्राधिकरण क्षेत्रांतर्गत सभी सेक्टरों में अलग-अलग टीमें गठित कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। एमडीडीए की इस मुहिम का उद्देश्य सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना तथा अवैध निर्माण गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

इसी क्रम में प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम द्वारा आज विकासनगर तहसील अंतर्गत रेतीवाला क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध कार्रवाई की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार विपक्षी श्री अभिनव बंसल एवं अन्य द्वारा रेतीवाला स्थित अतुल्यम रिजॉर्ट के निकट लगभग 10 बीघा भूमि पर बिना मानचित्र स्वीकृति प्राप्त किए अवैध प्लाटिंग विकसित की जा रही थी। उक्त भूमि पर प्लाटिंग हेतु सीसी सड़क का निर्माण भी कराया गया था, जो उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973) के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

प्रकरण का संज्ञान लेते हुए एमडीडीए द्वारा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था तथा अवैध निर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मौके पर नियमों की अनदेखी कर अवैध गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास किया गया।

प्राधिकरण के क्षेत्रीय अभियंताओं की रिपोर्ट के अनुसार उक्त अवैध प्लाटिंग को पूर्व में दिनांक 20 मई 2026 को ध्वस्त किया गया था। हालांकि इसके बाद भी संबंधित पक्ष द्वारा पुनः अवैध रूप से सड़क एवं प्लाटिंग संबंधी कार्य प्रारंभ करने का प्रयास किया गया। शिकायत एवं निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एमडीडीए की टीम ने पुनः मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से निर्मित सीसी सड़क तथा प्लाटिंग से संबंधित संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन दल, अभियंत्रण शाखा तथा स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में जेसीबी मशीनों की सहायता से अवैध निर्माणों को हटाया गया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृत मानचित्र एवं वैधानिक अनुमति के किसी भी प्रकार की प्लाटिंग अथवा निर्माण कार्य को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अवैध निर्माण करने वालों को चेतावनी
एमडीडीए ने आम जनता से भी अपील की है कि किसी भी भूखंड अथवा संपत्ति की खरीद-फरोख्त से पूर्व उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य कर लें। अवैध प्लाटिंग में निवेश करने से आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहती है। प्राधिकरण द्वारा ऐसे मामलों में लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण एवं अवैध प्लाटिंग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना एमडीडीए की प्राथमिकता है। जो लोग बिना अनुमति के निर्माण अथवा प्लाटिंग कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न सेक्टरों में गठित टीमें नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने नागरिकों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि किसी भी अवैध निर्माण अथवा प्लाटिंग की सूचना तत्काल प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

विशेष गहन पुनरीक्षण -2026 की प्रगति पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों संग डीएम/डीईओ की बैठक सम्पन्न


जिले में 98.22 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित, 2.06 लाख से अधिक मतदाताओं का डिजिटाइजेशन पूर्ण

देहरादून।
जनपद में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के सफल सम्पादनार्थ जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में आज जिला कार्यालय देहरादून में राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, मंत्रियों, प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रगति, मतदाता गणना प्रपत्र वितरण, डिजिटाइजेशन कार्य तथा राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए-1 एवं बीएलए-2 की स्थिति की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित ढंग से सम्पन्न करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करने तथा मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरने एवं समय पर उपलब्ध कराने के लिए जागरूक करने का आह्वान किया।  
निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं राजनीतिक दलों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक मतदान स्थल पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा बीएलए-2 की नियुक्ति की जा रही है। बैठक में बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 1,847, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा 1,765, तथा सीपीआई(एम) द्वारा 463 बीएलए-2 नियुक्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने अन्य राजनीतिक दलों से भी बीएलए-1 एवं बीएलए-2 की नियुक्ति कर सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।
जिलाधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 08 जून से 07 जुलाई 2026 तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र  वितरित किए जा रहे हैं। इसके उपरांत 14 जुलाई को प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन किया जाएगा तथा दावा एवं आपत्ति की प्रक्रिया पूर्ण कर 15 सितम्बर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जाएगी।
बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 13,76,813 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 17 जून 2026 तक 13,52,297 मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 98.22 प्रतिशत है। साथ ही 2,06,444 मतदाताओं का डिजिटाइजेशन कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है।
विधानसभावार समीक्षा में चकराता विधानसभा में सर्वाधिक 99.46 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरण दर्ज किया गया, जबकि मसूरी विधानसभा में 99.83 प्रतिशत वितरण कार्य पूर्ण हो चुका है। जनपद में कुल 1,881 बीएलओ विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में कार्यरत हैं।
बैठक में बताया गया कि जिन मतदाताओं को गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें बीएलओ के माध्यम से प्रपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे मतदाता जो अपने पते पर उपलब्ध नहीं मिल रहे हैं, उनके संबंध में बीएलओ द्वारा नियमानुसार सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी। जिन मतदाताओं तक गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में स्थानीय जांच के आधार पर कारणों का अभिलेखीकरण करते हुए अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट प्रविष्टियों की सूची तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित शिकायतों एवं जानकारी के लिए जिला मुख्यालय में कंट्रोल रूम/हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। हेल्प डेस्क के दूरभाष नंबर 0135-1950 एवं 0135-2726066 तथा मोबाइल नंबर 8273702146 पर संपर्क किया जा सकता है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), निर्वाचन से जुड़े अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी/उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सीपीआईएम से अनंत आकाश, बीएसपी से सत्येन्द्र सिंह, सतेन्द्र चौपड़ा, बीजेपी से अरविन्द जैन, उमेश तिवारी, संदीप मुखर्जी, सत्यपाल, आम आदमी पार्टी से चौधरी रविन्द्र कुमार, अशोक सेमवाल, प्रभारी सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली आदि उपिस्थत रहे।